Sutra ke ahkaam | Namazi ke samne se guzarne ka gunah

नमाजी के आगे से गुजरने का बयान | सूत्रा लगाने का सुन्नत तरीका

नमाज पढ़ने वाला अपने सामने कोई चीज रख ले जो उसके और सामने से गुजरने वाले के दरमियान आड़ बन जाए , उसे सुतरा कहते हैं |नमाज पढ़ने वाले के सामने से किसी का गुजरना गुनाह है . इसलिए शरीयत ने नमाज पढ़ते वक्त सुतरा लगाने का हुक्म दिया है ताकि अगर कोई शख्श अनजाने में या जान बूझ कर गुजर ना चाहे तो नमाज़ी के सामने से ना गुजरे बल्कि सूत्रे की आड़ से गुजर जाए |

हुज़ूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम सुथरा कैसे इस्तेमाल करते थे

हजरत अब्दुल्लाह बिन उमर रजि अल्लाह ताला अनहुमा से रिवायत है आप फरमाते हैं कि नबी ए करीम सल्लल्लाहो तालाअलैहि वसल्लम जब नमाज के लिए रवाना होते तो आपके सामने नीज़ा लेकर चला जाता , जिसे नमाज के वक़्त आपके सामने गाड़ दिया जाता है | और आप उसकी तरफ रुख करके नमाज पढ़ा करते|
मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों | इस रिवायत से पता चला कि हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम जब नमाज के लिए तशरीफ़ ले जाते तो पहले ही से सूत्रे की तैयारी करके जाते. आपके साथ आपके सहाबा नीज़ा लेकर जाते , जिसे आपके सामने गाड़ दिया जाता और आप उसकी तरफ अपना चेहरा करके नमाज पढ़ते |कुछ मस्जिदों में लकड़ी और लोहे का सुतरा बनाकर रखा हुआ रहता है ताकि नमाजी नमाज पढ़ते वक्त उसे इस्तेमाल कर ले , अगर ना हो तो नमाज पढ़ने वाले को चाहिए कि अपने घर से ही कोई ऐसी चीज लेकर जाए जिससे सुतरा के तौर पर इस्तेमाल कर सके।

जमात से नमाज पढ़ते वक्त इमाम का सुतरा मुक्तदी का सुतरा हो जाएगा

हजरत अबू जुहैफा रजि अल्लाहु ताला अन्हू से रिवायत है आप फरमाते हैं मैंने हुजूर सल्लल्लाहो ताला वसल्लम को मक्का में मकामे अब्तह में सुर्ख कुबा  पहने हुए देखा | आप वजू फरमा रहे थे | हजरत बिलाल रजि अल्लाह ताला अन्हु  आपके हाथों का बर्तन थामे हुए थे | वजू से जो पानी गिरता लोग उसे हाथों हाथ ले लेते जिसे मिल जाता वह अपने चेहरे पर मल लेता . और जिसे ना मिलता वह अपने साथी के हाथ की तरी ले लेता | फिर मैंने हजरत बिलाल रजि अल्लाह ताला अनहु को देखा कि आपने एक नीज़ा  लेकर गाड़ दिया | हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम सुर्ख कुबा पहने हुए निकले और आपने नीज़े की तरफ रुख कर के लोगों को 2 रकात नमाज पढ़ाई|  मैंने देखा कि लोग और चोपाए नीज़े के आगे से गुजर रहे थे |

सही बुखारी हिस्सा एक पेज 84

मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों इस रिवायत से पता चलता है कि अगर जमात से नमाज हो रही हो तो सिर्फ इमाम का सुतरा ले लेना काफी है |और इमाम का सुतरा  तमाम मुक्तादियों के लिए सुतरा होगा | लेकिन अगर जमात से नमाज नहीं हो रही है तो जिस जगह पर लोगों के गुजरने का खौफ हो वहां पर हर किसी को अपने लिए अलग-अलग सुतरा लेना होगा | या कोई ऐसी बड़ी चीज जो सबके सामने रखी जा सके , उसे रख कर नमाज पढनी होगी | मस्जिद की दीवार इमाम के सामने होती है इसलिए उसे अलग से सुतरा लेने की जरूरत नहीं है|

सवारी का भी सुतरा बनाया जा सकता है

हजरत नाफे हजरत अब्दुल्लाह बिन उमर रजि अल्लाह ताला अनहमा से रिवायत करते हैं वह कहते हैं कि नबी ए करीम सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम अपनी सवारी बिठाकर उसके तरफ रुख करके नमाज पढ़ लिया करते थे |

सही बुखारी हिस्सा एक पेज 1 07

मेरे प्यारे दोस्तों इस रिवायत से पता चलता है कि जानवर को भी सुतरा बनाया जा सकता है | कोई जरूरी नहीं कि किसी लकड़ी या बेजान चीज ही को सुतरा बनाया जाए | यहां तक कि अगर किसी नमाज़ी के सामने उसकी तरफ पीठ करके कोई शख्स बैठा हो तो उसके सामने से गुजरने में कोई हर्ज नहीं है | कहीं सफर में है तो मोटरसाइकिल, कार, बस वगैरह को भी सुतरा बना सकते हैं |

नमाजी के आगे से गुजरने का गुनाह

हजरत अबू जुहैम रजि अल्लाह ताला अनहु से रिवायत है कि हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद  फरमाया : अगर नमाजी के आगे से गुजरने वाला यह जान ले कि उसकी वजह से उस पर क्या गुनाह है तो 40 तक खड़ा रहना अपने लिए गुजरने से बेहतर समझेगा | रावी बयान करते हैं कि मुझे इसमें शक है कि आपने 40 दिन फरमाया या 40 महीने या 40 साल फरमाया |

सही बुखारी हिस्सा एक पेज 108

हजरत काब अहबार रज़ीअल्लाहू ताला अन्हो से रिवायत है की हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया : अगर नमाजी के आगे से गुजरने वाला यह जान ले कि उस पर कितना गुनाह है तो वह जमीन में धंस जाना उसके आगे गुजरने से बेहतर समझेगा |

मोत्ता इमाम मालिक हिस्सा एक पेज 155

अक्सर देखा गया है कि जमात के वक्त और जमात के खत्म कर लोग बड़ी तेजी से मस्जिद से निकलने की कोशिश करते हैं | खासतौर पर जुम्मा के दिन जल्दबाजी में उन्हें इस बात का भी ख्याल नहीं रहता कि वह किसी नमाज पढ़ने वाले के आगे से गुजर कर कितना बड़ा गुनाह कर रहे हैं| नमाजी के आगे से गुजरना कितना बड़ा गुनाह है . वह आपने दोनों रिवायतो मैं मुलाहिजा फरमाया | की अगर गुजरने वाला यह जान लें कि नमाजी के आगे से गुजर जाना कितना बड़ा गुनाह है तो 40 दिन या 40 महीने या 40 साल खड़ा रहना गुजरने से बेहतर समझेगा | इसी तरह जमीन में धंस जाना गुजरने से बेहतर समझेगा | हमें चाहिए कि अगर किसी हाजत की बिना पर मस्जिद से फौरन निकलना पढ़े तो इस बात का ख्याल रखें कि हम किसी नमाज़ी के आगे से हरगिज़ ना गुजरे |

जब सूत्रा ना मिले तो क्या करें

हजरत अबू हुरैरा रज़िअल्लाह ताला अनहु से रिवायत है कि रसूल अल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया : जब तुम में से कोई शख्स नमाज़ पढ़े तो उसे चाहिए कि अपने चेहरे के सामने कुछ रख ले , अगर कुछ ना मिले तो उसे चाहिए कि अपनी लाठी ही खड़ा कर ले, और अगर उसके पास लाठी भी ना हो तो उसे चाहिए कि अपने सामने एक लकीर यानी लाइन खींच ले फिर उसके सामने से गुजरने वाली कोई चीज उसे जरर नहीं देगी |

सुनन अबू दाऊद हिस्सा एक पेज 183

मेरे प्यारे दोस्तों इस रिवायत से पता चला कि सुथरा के तीन दर्जे हैं | चेहरे के सामने कोई ऐसी बड़ी चीज रखी जाए जिसे सुतरा के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है | अगर ऐसी कोई चीज ना मिले तो अपनी लाठी को अपने सामने खड़ा कर लिया जाए . और अगर लाठी भी ना हो तो कम से कम अपने सामने एक लकीर खींच लिया जाए | इससे अंदाजा होता है कि नमाज के दौरान सुतरे की कितनी अहमियत है |

सुतरा लेने का हुक्म क्यों दिया गया

हजरत अबू सईद खुदरी रजि अल्लाहु ताला अन्हू से रिवायत है तू हुजूर सल्लल्लाहो ताला वसल्लम ने इरशाद फरमाया : कोई चीज नमाज को नहीं तोड़ती मगर फिर भी जहां तक तुम से हो सके गुजरने वाले को मना करो क्योंकि वह शैतान होता है |

सुनन अबू दाऊद हिस्सा एक पेज 191

मेरे प्यारे दोस्तों बहुत से लोग यह समझते हैं कि अगर कोई शख्स सामने से गुजर गया तो नमाज टूट गई, मगर ऐसा नहीं है | किसी के सामने से गुजरने से नमाज नहीं टूटती और ना ही नमाज पढ़ने वाले पर कोई गुनाह है, अलबत्ता इतना ख्याल रखना चाहिए कि गुजरने वाला जरूर गुनहगार होगा | शैतान नमाजी की तवज्जो बांटने के लिए लोगों को उसके सामने से गुज़ारता है| इसीलिए सुतरा लगाने का हुक्म हुआ ताकि शैतान अपने इस मकसद में कामयाब ना हो सके इसलिए हम सब को चाहिए कि जब नमाज़ पढ़े हैं और ऐसा लगता हो कि कोई सामने से गुजर जाएगा तो वहां पर सुतरा का इस्तेमाल जरूर किया जाए ताकि गुजरने वाले को गुनाह से बचाया जा सके |


Namaz ki fazilat | पांच नमाजो की फजीलत Hindi

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