Namaz ki fazilat | पांच नमाजो की फजीलत Hindi

पांच नमाजो की फजीलत | Namaz ki fazilat

मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों अस्सलाम वालेकुम रहमतुल्ला ही व बरकातुह आज मैं आपको पांच नमाज की फजीलत बताऊंगा. हुजूर नबी ए करीम सल्लल्लाहो ताला अलैहिवसल्लम ने फरमाया है : कि जब नमाज का वक्त आता है तो एक फरिश्ता ऐलान करता है कि आदम की औलाद उठो और जहन्नम की आग को बुझा लो. जिसको तुमने गुनाहों की वजह से अपने ऊपर जलाना शुरू कर दिया है , तो ईमान दार लोग उठते हैं वज़ू करते हैं और जोहर की नमाज पढ़ते हैं .जिसकी वजह से उनके सुबह से जोहर तक के गुनाहों की मगफिरत कर दी जाती है. इसी तरह फिर असर के वक़्त यहां तक कि हर नमाज के बाद यही सूरत होती है. ईशा के बाद लोग सोने में मशरूफ हो जाते हैं उसके बाद कुछ लोग बुराइयों की तरफ चल देते हैं जैसे कि जिनाकारी ،बदकारी ، चोरी वगैरा की तरफ चल देते हैं. और कुछ लोग भलाई की तरफ चल देते हैं जैसे की नमाज, वजीफा, जिक्र वगैरा की तरफ चल देते हैं.तो ऐसे लोगों के लिए अल्लाह का बहुत बड़ा इनाम है |

नमाजियों के लिए फरिश्तों का खैर मकदम

       हजरत अबू हुरैरा रजि अल्लाह ताला अनहु  से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो तालाअलेही वसल्लम ने इरशाद फरमाया : तुम मे रात और दिन को फरिश्ते बारी-बारी आते हैं. और वह फजर और असर की नमाज में जमा होते हैं. फिर ऊपर चढ़ते हैं और वह फरिश्ते जिन्होंने तुम मे रात गुजारी होती है तो उनसे अल्लाह ताला पूछता है( हालांकि अल्लाह खूब जानता है )कि फरिश्तो तुमने मेरे बन्दों को किस तरह छोड़ा है. तुमने मेरे मेरे बन्दों को किस हाल में पाया : फरिश्ते कहते हैं हमने उनको इस हाल में छोड़ा है कि वह नमाज पढ़ रहे थे और हम उनके पास गए तो वह नमाज पढ़ रहे थे |

बुखारी शरीफ

      मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों इस हदीस शरीफ से यह बात समझ में आती है कि फरिश्तों की ड्यूटी तब्दील होने का वक्त फजर और असर का वक्त है. अगर बंदा फजर और असर की नमाज अदा करता है तो मासूम फरिश्ते रब ताला की बारगाह में उस बंदे का जिक्र नमाज़ी की हैसियत से करते हैं . तो अल्लाह अपने बंदे को सजदे में होने का सुनकर खुश होता है. और जब वह खुश हो जाए तो यकीनन अपनी रहमतों से मालामाल कर देगा. फजरऔर असर का वक्त जो निहायत ही अहम है फजर के वक्त नींद का गल्बा होता है और असर के वक्त इंसान तिजारत में मशरूफ होता है जिसकी वजह से नमाज छोड़ने का ज्यादा अंदेशा रहता है. लेकिन अगर बंदा नमाज अदा कर लेता है तो अल्लाह ताला राजी हो जाता है.

नमाजी के लिए नमाज खुद दुआ करती है | Namazi ke liye Namaz ki dua

हुजूर सय्यदेआलम सल्लल्लाहो ताला अलेही वसल्लम ने फरमाया जब बंदा नमाज के अव्वल वक्त में नमाज पढ़ता है तो उसकी नमाज आसमानों तक जाती है और वह नूरानी शक्ल में होती है यहां तक कि अरशे इलाही तक जा पहुंचती है और नमाज़ी के लिए कयामत तक दुआ करती रहती है. कि अय अल्लाह तू इस बंदे की हिफाजत फरमा जैसे तूने मेरी हिफाजत की है. और जब इंसान बगैर वक्त नमाज पढ़ता है तो उसकी नमाज काले शक्ल में आसमान की तरफ जाती है. जब वह आसमान तक पहुंचती है तो उसे वो बोलीदा कपड़े की तरह लपेट कर पढ़ने वाले के मुंह पर मार दी जाता है.

बैहकी शरीफ

       मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों आप अंदाजा लगाएं कि वक्त पर नमाज अदा करने की बरकत कितनी है और बेवक्त नमाज अदा करने का बवाल क्या है। आज के दौर मे वक्त पर तो दूर की बात है अक्सर लोग तो बिल्कुल ही नमाज अदा नहीं करते. और नमाज से दूर होते हैं. और ऐसा करने में कुछ अफसोस भी नहीं करते. गौर करें जब बेवक्त पढ़ने का बवाल यह है तो ना पढ़ने का अंजाम कितना सख्त होगा। अल्लाह ताला हमारे सगीरा और कबीरा गुनाह माफ फरमाए और पाबंदी से वक्त पर नमाज अदा करने की तौफीक अता फरमाए।

नमाज़ तमाम बुराइयों से रोकती है

अल्लाह ताला ने एक मकाम  पर नमाज की फजीलत को बयान करते हुए इरशाद फ़रमाया : और नमाज कायम करो बेशक नमाज बे हयाई और बुरी बात से रोकती है |

कंजुल ईमान पारा  21 रुकु  नंबर 1

        मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों इस आयत में मौजूदा दौर की परेशानियों का हल मौजूद है .आज हर साहिबे ईमान को इस बात की फिक्र है कि बे हयाई और बुराइयों के सैलाब से कैसे बचे और लोगों को कैसे बचाया जाए तो सुनो |अल्लाह ताला ने हमें दिन और रात में पांच नमाजो का हुक्म दिया .नमाज अदा करने वाला बंदा दिन में पांच वक्त अपने बदन से लेकर कपड़ों तक की पाकीज़गी  की का ख्याल रखता है | एक नमाजी दिन में 5 मर्तबा अपने रब की बारगाह में हाजिरी देता है और उसे यह फ़िक्र लाहिक  रहती है कि अगर मैं अपने दामन को गुनाहों से आलूदा करूंगा तो रब्बे कबीर की बारगाह में कौन सा मुंह लेकर हाजिर होऊंगा |

बस इसी जिंदा एहसास की बदौलत नमाजी बहुत से गुनाहो और बेहयाई  के कामों ,और अपने मौला की नाराजगी से बच जाता है |मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों आपने कुराने  मुकद्दस के चंद आयात से नमाज़ की अहमियत और अजमत का अंदाजा बखूबी लगा लिया होगा |इसलिए अब आप पर ज़रूरी है की खुद भी नामज़ पढ़ें और अपने दोस्तों , घर वालों को भी नमाज़ पढने के लिए कहें |

नमाज़ पढने वाले को जन्नती होने की बशारत

हजरत अबू हुरैरा रजि अल्लाह ताला अनहु  से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम के पास एक देहाती आया उसने कहा मुझे ऐसा अमल बताएं कि जब मैं उसे कर लूं तो जन्नत में दाखिल हो जाऊं . आपने फरमाया : अल्लाह की इबादत कर, उसके साथ किसी को शरीफ ना ठहरा , फर्ज नमाज पढ़ ,और फ़र्ज़  जकात अदा कर, रमजान के रोजे रख ,उसने कहा उस जात केक़सम  जिसके कब्जे में मेरी जान है ना मैं इस अमल पर कुछ ज्यादा करूंगा ना इससे कुछ कम करूंगा | जब वापस हुआ तो नबीए करीम सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने फरमाया : जिस शख्स को यह पसंद हो कि वह एक जन्नती  आदमी को देखें तो वह इस देहाती की तरफ देख ले |

(मुस्लिम शरीफ जिलद  एक पेज 30)

    मेरे प्यारे इस्लामी भाइयों इस हदीस शरीफ में कई आमाल का जिक्र किया गया जिनमें से एक सबसे अहम और अफजल अमल नमाज है | नमाज कायम करने वाला इतना अजीम  है कि हुजूर सल्लल्लाहो ताला अलैहि वसल्लम ने ऐसे शख्स को जन्नती फरमाया है | जिस किसी को ख्वाहिशें जन्नत हो उसे चाहिए की वो  नमाज की पाबंदी करें | और अपने आप को तरके नमाज से बचाए ,रोजो का पाबंद बने ,जकात फर्ज हो तो जकात अदा करें | इंशाल्लाह इन आमाल की पाबंदी दुनिया ही में जन्नत की बशारत का मस्त अहित बना देगी |

अजहर अलीमी


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